एक व्यक्ति को क्या अनुभव करना पड़ता है, तब जाकर उसे गहन ज्ञान की प्राप्ति होती है? (भाग 2)


1、 एक राज़ की बात बताता हूँ तुम्हें।

दरअसल यह दुनिया उल्टी है। अगर तुम अच्छे से जीना चाहते हो, तो तुम्हें हर व्यक्ति के व्यवहार के पीछे छिपी मूलभूत तर्क प्रणाली को पहचानना सीखना होगा। मसलन, तुम किसी कंपनी में नौकरी के लिए या साझेदारी के लिए जाते हो, और दीवार पर लिखा मिलता है ‘होउ दे ज़ाई वू (厚德載物 — महान सद्गुण से सब कुछ संभालना)’ — तो ऐसा मालिक आमतौर पर सबसे ज़्यादा बेईमान निकलता है।

जो मालिक ‘तियान दाओ चोउ चिन (天道酬勤 — स्वर्ग परिश्रमी को पुरस्कृत करता है)’ का बोर्ड लगाए बैठा है, वह पक्का हर दिन बेकार की भागदौड़ में लगा रहता है।

‘छंग शिन यिंग तियान श्या (誠信贏天下 — ईमानदारी से पूरी दुनिया जीतो)’ का नारा लगाने वाला मालिक, सबसे बड़ा वादाखिलाफ़ निकलता है।

‘शांग शान रुओ शुई (上善若水 — सर्वोच्च अच्छाई जल के समान है)’ टाँगने वाला मालिक, तुमसे भी ज़्यादा संकीर्ण मन का होता है।

जिसने बुद्ध की मूर्ति रखी है, संभावना यही है कि उसने इतने घिनौने काम किए हैं कि अब पश्चाताप कर रहा है।

अगर ‘चाई य्वान ग्वांग जिन (財源廣進 — धन का निरंतर प्रवाह हो)’ लिखा दिखे, तो कुछ मत सोचो, भागो। मालिक तुमसे भी ज़्यादा कंगाल है।

यही है यांगमिंग महाशय का झिशिंग हेयी (知行合一 — ज्ञान और कर्म की एकता, वांग यांगमिंग का दर्शन)। हर व्यक्ति का कार्य, हर व्यक्ति के व्यवहार के पीछे, निश्चित रूप से उसकी अपनी समझ के अनुरूप कुछ होता है। जो आदमी हर वक्त पैसे की बात करता है, ज़रूरी नहीं कि उसके पास पैसे की कमी हो, लेकिन वह निश्चित रूप से पैसे से प्यार करता है, पैसे की कद्र करता है।

2、 किसी एक को चुन लिया, तो सच्चे दिल से उसी एक के साथ रहो।

अधूरे मन से किसी रिश्ते में मत घुसो, यह समय की बरबादी है और न ही तुम सामने वाले की ऊर्जा ग्रहण कर पाओगे।

अगर लगे कि यह व्यक्ति सही नहीं है, तो झिझके बिना दरवाज़ा बंद कर दो।

रिश्तों को ऐसे निभाना ही सबसे तेज़ विकास का रास्ता है।

3、 दरअसल समाज में जिन्होंने संघर्ष किया है, वे जानते हैं — यह समाज स्त्री-पुरुष का भेद नहीं करता, सिर्फ़ ताकतवर और कमज़ोर का फ़र्क करता है।

कुछ दिखने में नाज़ुक और मासूम खरगोश जैसी लड़कियाँ अंदर से पत्थर जैसी कठोर होती हैं, और बाहर से तगड़े और बलिष्ठ दिखने वाले मर्द अंदर से चूज़े जैसे कमज़ोर हो सकते हैं। तो अंदरूनी ताकत या कमज़ोरी का बाहरी रूप से कोई लेना-देना नहीं, और न ही लिंग से कोई संबंध है।

पहले मुझे भी पुरुषों से नफ़रत थी, मैं ‘girls help girls’ पर यकीन करता था। फिर एक ऐसी लड़की से पीठ में छुरा खाया जो पुरुषों से प्यार और महिलाओं से नफ़रत करती थी, तब जाकर समझ आया कि किसी से नफ़रत की वजह लिंग नहीं, सिर्फ़ चरित्र होता है।

स्त्री और पुरुष दोनों में अच्छे-बुरे लोग होते हैं, लिंग के आधार पर फ़ैसला नहीं करना चाहिए। सिर्फ़ हित और मूल्य मायने रखते हैं — अगर वह तुम्हारे काम का है, तो संबंध रखो; अगर बेकार है, तो दूर हो जाओ।

किसी से चोट खाने के बाद तुरंत अलग हो जाओ, सङ्क कोस्ट (sunk cost — डूबी हुई लागत) को और मत बढ़ाओ। जो तोड़ना है तोड़ो। उस्ताद लोग माई द्वान ली शोउ (買斷離手 — नुकसान उठाकर भी हाथ खींच लेना) करते हैं, फ़ायदा-नुकसान ख़ुद जिम्मेदारी से उठाते हैं।

इंसान को अपनी पसंद और अपनी सोच की कीमत चुकानी पड़ती है। अगली बार बचकर रहना, बस इतना ही। कोई भी पूर्ण नहीं है, चोट में बहुत ज़्यादा डूबे मत रहो।

4、 दूसरों की किस्मत में ज़रूरत से ज़्यादा दखल मत दो। मेरे ख़याल से एक और बात यह है कि—

सामने वाला भी आदतन निर्भरता विकसित कर लेता है। उसके अवचेतन में यह बैठ जाता है कि कोई न कोई मुझे बचा लेगा (दाओ दी — 兜底)। इसलिए चाहे कितना भी बड़ा कांड कर ले, उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। और जब तक वह शान च्योंग शुई जिन (山窮水盡 — पहाड़ खत्म और पानी समाप्त, यानी सारे रास्ते बंद) की हालत तक नहीं पहुँच जाता, वह अपनी मनमर्ज़ी से ही चलता रहेगा।

उसे नहीं लगता कि पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है, इसलिए वह कामों में उतनी सावधानी नहीं बरतता।

अगर तुम आदतन किसी के लिए बचावकर्ता (दाओ दी) बन जाते हो — उसे समझाते हो, हर मुमकिन तरीके से उसकी समस्या सुलझाने की कोशिश करते हो — तो वह भी आदतन निर्भर हो जाएगा, आदतन गड़बड़ करेगा, और तुम्हें सफ़ाई करनी पड़ेगी (चा पी गू — 擦屁股)।

लेकिन वह तुम्हारा शुक्रगुज़ार नहीं होगा।

वह इसे बस स्वाभाविक मान लेता है। जिस दिन तुम उसे बचाना बंद कर दोगे, वह तुमसे नफ़रत भी करेगा।

इसलिए सबसे अच्छी बात यही है कि पहले अपने तन और मन की देखभाल करो। दूसरों के मामले में ज़रूरत से ज़्यादा दखल मत दो। हर इंसान को अपनी ज़िंदगी की ज़िम्मेदारी ख़ुद लेनी चाहिए। जब वह ख़ुद ज़िम्मेदार नहीं ले रहा, तो तुम क्यों उसकी ज़िम्मेदारी उठाओ?